गदरपुर: उत्तराखंड की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके साथ विवाद कोई अपवाद नहीं बल्कि पहचान बन चुके हैं। गदरपुर विधायक अरविंद पांडे का नाम अब उसी फेहरिस्त में मजबूती से दर्ज होता दिख रहा है। ताज़ा मामला उनकी ही विधानसभा के विजपुरी गांव से जुड़ा है, जहाँ की रहने वाली बुजुर्ग महिला परमजीत कौर और उनके पुत्र अवतार सिंह को न्याय के लिए SDM कार्यालय के बाहर धरना देने को मजबूर होना पड़ा।

पीड़ित परिवार का आरोप सीधा और गंभीर है कि वर्ष 2019 में उनकी लगभग एक हेक्टेयर की कीमती कृषि भूमि को 30 वर्षों की लीज के नाम पर विधायक जी के भाई के नाम दर्ज करा लिया गया। शुरुआत में केवल एक एकड़ की बात कही गई, लेकिन कागज़ी खेल ऐसा चला कि पूरी जमीन ही उनके हाथ से निकल गई।हालांकि विधायक अरविंद पांडे इन आरोपों को लगातार सिरे से खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि मामला पूरी तरह निराधार है और वे किसी भी जांच से भाग नहीं रहे हैं। सार्वजनिक रूप से वे यह भी कहते हैं कि अगर प्रशासन या सरकार जांच कराती है, तो वे हर स्तर पर सहयोग को तैयार हैं।

लेकिन यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर विधायक जी वाकई पाक-साफ हैं, अगर जमीन पर उनका या उनके परिवार का कोई गलत दावा नहीं है, तो फिर चार वर्षों से यह प्रकरण क्यों लटका हुआ है? अगर मामला साफ है, तो विवादित जमीन को छोड़ने में या स्पष्ट समाधान निकालने में इतनी देर क्यों?

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जांच की बात केवल बयानबाज़ी तक सीमित है, ज़मीनी स्तर पर न तो कार्रवाई आगे बढ़ती है और न ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाता है। यही वजह है कि “हम जांच को तैयार हैं” जैसे बयान अब सवालों के घेरे में हैं। क्योंकि जब न्याय में देरी होती है, तो वह देरी अपने-आप में सत्ता के दुरुपयोग का संकेत बन जाती है।

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