उत्तराखंड के लालढांग रेंज में 1402 मीटर लंबी हाथी सुरक्षा दीवार का निर्माण भूमि विवाद के कारण रुका हुआ है। एनजीटी के निर्देश के बावजूद, वन और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में अंतर है, और 1960 से पहले के राजस्व दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं,जिससे जमीन का मालिकाना हक तय नहीं हो पा रहा है। विवाद न सुलझने पर वन विभाग ने हाथी रोधक खाई और सोलर फेंसिंग बनाने की वैकल्पिक योजना पेश की है।
देहरादून। लाल ढांग रेंज में हाथियों से सुरक्षा के लिए सिम्बलखाल से सिडकुल तक 1402 मीटर लंबी दीवार बनाने की कवायद कागजों में गुम हो गई है। एनजीटी ने साल 2024 में दीवार निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए थे,लेकिन वन विभाग और राजस्व विभाग के रिकार्ड में फर्क होने की वजह से अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि उस जमीन का मालिकाना हक असल में किसका है।
अब, एनजीटी के निर्देश पर असल मालिक की तलाश हुई तो एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। वन विभाग की ओर से एनजीटी को बताया गया है कि विवादित क्षेत्र से संबंधित सन 1960 से पुराने राजस्व मानचित्र और अभिलेख तलाशने की भरसक कोशिश की गई लेकिन उससे संबंधित कोई दस्तावेज सरकारी अभिलेखागार में नहीं मिले हैं।इस कारण उस भूमि के स्वामित्व का निर्धारण नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में वन विभाग की ओर से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में शपथ पत्र दाखिल किया है।
शपथ पत्र में प्रभागीय वनाधिकारी (कोटद्वार) जीवन दगाड़े ने एनजीटी को बताया है कि जमीन विवाद को सुलझाने के लिए राजस्व परिषद देहरादून और जिला भू-लेख कार्यालय पौड़ी से पत्राचार किया गया था। शासन और जिलाधिकारी हरिद्वार की रिपोर्ट के मुताबिक, तमाम प्रयासों के बाद भी 1960 से पूर्व के बंदोबस्ती नक्शे और खतौनी राजकीय अभिलेखागार में नहीं मिल सके हैं।
मामले को विभाग में उच्च स्तर पर उठाया गया, जिसके बाद प्रभागीय वन अधिकारी को निर्देश है कि वे गढ़वाल आयुक्त के साथ समन्वय करके इस मुद्दे को प्रशासनिक रूप से हल करने के लिए प्रयास करें।
बता दें कि यह मामला मोहन चंद्र सती की ओर से दाखिल याचिका से गरमाया है। क्षेत्र में हाथियों के हमले रोकने के लिए एनजीटी ने 19 नवंबर 2024 को दीवार निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए थे
इसलिए फंसा है पेंच
दरअसल, वन विभाग इस क्षेत्र को लालढांग रेंज का आरक्षित वन हिस्सा बताता है, जबकि मौजूदा राजस्व रिकार्ड इसे गांवों की जलमग्न भूमि के रूप में दर्शाते हैं। जब तक पुराने रिकार्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि यह भूमि मूल रूप से किसकी है, तब तक करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य शुरू करना और बजट खर्च करना तकनीकी व कानूनी रूप से मुश्किल है।
विवाद गहराया तो अब खाई खोदने का इरादा
शपथ पत्र में वन विभाग ने एक वैकल्पिक योजना भी पेश की है, जिसके मुताबिक यदि भूमि विवाद नहीं सुलझता है तो विभाग पूरी तरह से वन भूमि के दायरे के भीतर हाथी रोधक खाई और सोलर फेंसिंग का निर्माण करेगा। इसके लिए अलग से प्रस्ताव तैयार किया गया है। वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से 15 कैमरा ट्रैप के जरिए क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।

