नैनीताल। हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा कांड में मुख्य साजिशकर्ता व मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मलिक पर दर्ज तीनों मुकदमों में जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

मलिक पर आठ फरवरी 2024 को मुकदमा दर्ज होने के बाद 15 दिन बाद 24 फरवरी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में बंद है।गुरुवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई।

पिछली सुनवाई को कोर्ट ने सरकार और आरोपित के अधिवक्ता से पूछा था कि मलिक पर दर्ज मुकदमों की वर्तमान स्थिति क्या है, कितने केसों में बरी हो चुके और कितने विचाराधीन है।

दंगे में मलिक पर चार मुकदमे

राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि जांच के दौरान मलिक के विरुद्ध इन केसों के अलावा अन्य सात मुकदमे दर्ज होने की पुष्टि हुई है।कई मामलों में बरी हो चुके हैं। कुछ का पता अभी नहीं चल सका है।

मुकदमों की कोई पुष्टि न होने के कारण आज इस दंगे वाले मुकदमे से कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने को कहा है। दंगे में मलिक पर चार मुकदमे दर्ज थे, जिसमें से एक में पहले जमानत मिल चुकी थी और तीन में अब जमानत मिल गयी है।

अभियोजन के अनुसार मलिक को राजकीय भूमि को खुर्द बुर्द करने के साथ सरकारी काम में व्यवधान पैदा करवाने व दंगे की साजिश रचने का आरोप है। मलिक सहित अन्य के विरुद्ध बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। एक मामला यह था कि मलिक ने कूटरचित ,झूठे शपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया। नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे खुर्दबुर्द किया।

राज्य सरकार का कहना था कि बनभूलपुरा कांड की शुरुआत यही से हुई थी। जब प्रशासन सहित नगर निगम व पुलिस टीम अवैध अतिक्रमण को हटाने गई तो भीड़ की ओर से पथराव किया गया। बाद में दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए और पांच लोगों की जान तक चली गयी। मलिक का कहना था कि उसे झूठा फंसाया गया है। बनभूलपुरा दंगा मामले में सौ से अधिक आरोपितों की जमानत मंजूर हो चुकी है।

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